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झारखंड-बिहार में PM सूर्य घर रूफटॉप सोलर: आपके सिस्टम को कौन-सी सुरक्षा चाहिए

बिहार और झारखंड में PM सूर्य घर के आधिकारिक आँकड़े, केंद्र की सब्सिडी, और रूफटॉप सोलर के लिए ज़रूरी बिजली सुरक्षा: आइसोलेटर, SPD, MCB और अर्थिंग।

PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत बिहार और झारखंड में ज़्यादा से ज़्यादा परिवार छत पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं। ज़्यादातर बात पैनल और सब्सिडी पर होती है। यह लेख उस कम चर्चा वाले हिस्से के बारे में है जो सिस्टम को 20 साल से ज़्यादा सुरक्षित रखता है: पैनल, इन्वर्टर और घर की वायरिंग के बीच की सुरक्षा।

बिहार और झारखंड कहाँ हैं (आधिकारिक आँकड़े)

लोकसभा में दिए एक जवाब में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 4 अगस्त 2026 तक के आँकड़े बताए:

  • बिहार: 25,157 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगे, 25,790 घरों को फायदा मिला, और 165.36 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी हुई। अकेले पटना ज़िले में 9,899 सिस्टम लगे।
  • झारखंड: 3,371 सिस्टम लगे, 3,592 घरों को फायदा मिला, और 21.97 करोड़ रुपये जारी हुए।

आगे चल रहे राज्यों के मुकाबले दोनों राज्य अभी शुरुआती दौर में हैं। यानी बढ़ने की बहुत गुंजाइश है, और ज़्यादातर लोग पहली बार सोलर लगवा रहे हैं, जहाँ बुनियादी बातें सही होना सबसे ज़रूरी है।

सब्सिडी, संक्षेप में

योजना के आधिकारिक सब्सिडी ढाँचे के मुताबिक घरों को पहले 2 kW तक 30,000 रुपये प्रति kW, और 3 kW तक की अतिरिक्त क्षमता पर 18,000 रुपये मिलते हैं। 3 kW या उससे बड़े सिस्टम पर कुल सब्सिडी 78,000 रुपये तक सीमित है। आवेदन राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर होता है।

सुरक्षा की चेकलिस्ट

ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सिस्टम में एक DC हिस्सा होता है (पैनल से इन्वर्टर तक) और एक AC हिस्सा (इन्वर्टर से आपके DB और मीटर तक)। दोनों को अपनी-अपनी सुरक्षा चाहिए। अपने इंस्टॉलर से इन पर बात कीजिए:

  • DC आइसोलेटर: मेंटेनेंस के समय पैनल को इन्वर्टर से सुरक्षित तरीके से अलग करने के लिए।
  • DC फ्यूज़ या DC रेटिंग वाला ब्रेकर, जहाँ डिज़ाइन में ज़रूरी हो। DC की चिंगारी AC से अलग बर्ताव करती है, इसलिए उपकरण DC रेटिंग के ही हों।
  • सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (SPD) DC और AC दोनों तरफ। छत खुली होती है, और हमारे इलाके में बरसात के मौसम में बिजली गिरना आम है।
  • AC MCB और आइसोलेटर इन्वर्टर और DB के बीच, इन्वर्टर के आउटपुट के हिसाब से सही रेटिंग का।
  • RCCB, AC तरफ अर्थ लीकेज से बचाव के लिए, जैसा इंस्टॉलर सलाह दे।
  • सही अर्थिंग पैनल के ढाँचे, इन्वर्टर और SPD के लिए, और ज़रूरत हो तो लाइटनिंग अरेस्टर भी।
  • सही केबल: छत पर धूप झेलने वाला सोलर DC केबल, करंट के हिसाब से सही साइज़ का, साफ-सुथरी रूटिंग और सील किए ग्लैंड के साथ।

काम की कुछ बातें

  • राष्ट्रीय पोर्टल पर बताए गए सूचीबद्ध वेंडर और DISCOM निरीक्षण की प्रक्रिया अपनाएँ।
  • इन्वर्टर को हवादार, छाँव वाली जगह पर, पानी से दूर रखें।
  • आँधी-तूफान के बाद कुछ भी दोबारा चालू करने से पहले ढीले तार, टूटे पैनल या ट्रिप हुए उपकरण देख लें।

रांची का ATRICL पूरे झारखंड और बिहार में रूफटॉप और कमर्शियल प्रोजेक्ट के लिए स्विचगियर, MCB, RCCB, डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड और केबल सप्लाई करता है। अपने इंस्टॉलर का सिंगल-लाइन डायग्राम या BOM भेजिए, सुरक्षा वाले हिस्से में हम मदद करेंगे।

यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। बिजली का कोई भी काम योग्य, लाइसेंसधारी इलेक्ट्रीशियन से ही करवाएँ। ATRICL GeM-रजिस्टर्ड है।

स्रोत

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