अक्टूबर के पहले दो हफ्तों में रांची से आग लगने की कई खबरें आईं, और लगभग हर खबर में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई। राहत की बात यह रही कि इन घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। लेकिन यह याद दिलाने के लिए काफी है कि दीवार के पीछे की वायरिंग पर हमारा ध्यान तभी जाता है जब कुछ गड़बड़ हो जाए। यहाँ किसी पर उंगली उठाने की बात नहीं है। बात बस इतनी है कि घर, दुकान या दफ्तर में इसी हफ्ते हम खुद क्या देख सकते हैं।
खबरों में क्या आया
- 5 अक्टूबर, हिनू: डोरंडा थाना क्षेत्र में एक इमारत की तीसरी मंजिल पर एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी के दफ्तर में आग लगी। PTI के मुताबिक पुलिस ने वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट मानी। चार दमकल गाड़ियों ने करीब दो घंटे में आग बुझाई। कंप्यूटर, कागजात और फर्नीचर जल गए, नुकसान सवा करोड़ रुपये से ज़्यादा बताया गया। कोई घायल नहीं हुआ।
- 6 अक्टूबर, स्टेट लाइब्रेरी: न्यूज़वेव झारखंड के अनुसार गर्ल्स सेक्शन के एक कोने में लगे बिजली बोर्ड से चिंगारियाँ निकलीं और पास रखे फर्नीचर व कागज़ों ने आग पकड़ ली। उस वक्त छात्राएँ पढ़ाई कर रही थीं। वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई। सब सुरक्षित बाहर निकल आईं और बिजली काट दी गई।
- 11 अक्टूबर, लालपुर: लगातार न्यूज़ के मुताबिक NIBM गली के एक घर में आग लगी। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई, असली वजह की जाँच चल रही थी। कीमती सामान और कागजात जल गए, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
आग की असली वजह आधिकारिक जाँच से ही तय होती है। हमने यहाँ वही लिखा है जो रिपोर्ट में छपा।
15 मिनट की जाँच, जो आप खुद कर सकते हैं
इसके लिए ज़्यादातर किसी औज़ार की ज़रूरत नहीं। बस ध्यान से देखिए और सूँघिए।
- DB (डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड) खोलकर देखें। अंदर सही MCB लगे हैं, या अब भी पुराने फ्यूज़ में तार लपेटकर काम चल रहा है? मेन लाइन पर RCCB (या RCBO) है या नहीं? RCCB अर्थ लीकेज पर ट्रिप करता है, जो अकेला MCB नहीं पकड़ पाता।
- छूकर और सूँघकर देखें। कोई स्विच, प्लग या DB का कवर गर्म लगे, या हल्की जलने जैसी गंध आए, तो जल्दी इलेक्ट्रीशियन बुलाइए।
- सॉकेट पर कितना लोड है? हीटर, प्रेस या गीज़र को मल्टी-प्लग एक्सटेंशन बोर्ड पर चलाना आम गलती है। भारी उपकरण के लिए अलग, सही रेटिंग का सॉकेट होना चाहिए।
- पुराने तार देखें। फटी इंसुलेशन, टेप लगे जोड़, फॉल्स सीलिंग या फर्नीचर के पीछे लटकते तार, इन्हें ठीक करवा लीजिए।
- RCCB का टेस्ट बटन दबाएँ। ज़्यादातर RCCB पर "T" लिखा बटन होता है। दबाने पर उसे ट्रिप होना चाहिए। न हो, तो जाँच करवाइए।
- मेन स्विच कहाँ है, सबको पता हो। घर या दफ्तर के हर व्यक्ति को।
दुकान, दफ्तर और लाइब्रेरी वालों के लिए
सालों में दुकान-दफ्तर का लोड धीरे-धीरे बढ़ता जाता है: और कंप्यूटर, और AC, कहीं प्रिंटर, कहीं वॉटर डिस्पेंसर। पुरानी वायरिंग इतने लोड के हिसाब से शायद ही बनी होती है।
- इलेक्ट्रीशियन से पूछिए कि हर MCB की रेटिंग उस तार के हिसाब से सही है या नहीं। पतले तार पर बड़ा MCB लगाना "अपग्रेड" नहीं है।
- DB और मीटर के पास कागज़, कार्टन या फर्नीचर न रखें।
- समय-समय पर जाँच करवाएँ। स्विचगियर या CCTV का मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट है, तो उसमें DB भी जुड़वा लें।
- पैनल के पास सही किस्म का फायर एक्सटिंग्विशर रखें, और स्टाफ को बताएँ कि चालू बिजली वाले सामान पर कभी पानी न डालें।
कब तुरंत इलेक्ट्रीशियन बुलाएँ
बार-बार ट्रिप होना, MCB का दोबारा न चढ़ना, काले निशान या जलने की गंध, ये रुककर लाइसेंसधारी इलेक्ट्रीशियन बुलाने के संकेत हैं। ट्रिप होते MCB को बार-बार चढ़ाते रहना, या उसकी जगह बड़ी रेटिंग का MCB लगा देना ठीक नहीं। ट्रिप होना ही तो चेतावनी है।
पुराने फ्यूज़ बदलने हों या RCCB लगवाना हो, तो अपर बाज़ार, रांची में ATRICL सही स्विचगियर चुनने और सप्लाई में मदद कर सकता है। हम झारखंड और बिहार के लिए C&S Electric के ऑथराइज्ड सर्विस पार्टनर हैं। फिटिंग हमेशा योग्य इलेक्ट्रीशियन से ही करवाएँ।
यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। बिजली का कोई भी काम योग्य, लाइसेंसधारी इलेक्ट्रीशियन से ही करवाएँ। ATRICL GeM-रजिस्टर्ड है।